पंचायत चुनावः वाराणसी-गोरखपुर में आम आदमी पार्टी की दस्तक, ओवैसी का भी बढ़ा ग्राफ  

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के जरिए अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM भले ही बहुत बड़ा करिश्मा नहीं दिखा सकी है, लेकिन अच्छी खासी सीटें जीतने में जरूर सफल रही है. आम आदमी पार्टी ने पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और सीएम योगी के गृहजनपद गोरखपुर में जिला पंचायत की एक-एक सीट जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है. वहीं, AIMIM ने सपा प्रमुख के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से लेकर डिप्टी सीएम केशव मौर्य के प्रयागराज में एंट्री मारी है.




आम आदमी पार्टी पहली बार यूपी पंचायत चुनाव में उतरी थी, जिसने जिला पंचायत सदस्य से लेकर ग्राम प्रधान और बीडीसी पद के लिए बड़ी तादाद में अपने समर्थित कैंडिडेट उतारे थे. ऐसे में यूपी के कुल 3050 जिला पंचायत सदस्य पद पर हुए चुनाव में से आम आदमी पार्टी को 64 सीटों पर जीत जीत मिली है.

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वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने सूबे के तकरीबन 220 जिला पंचायत सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से 22 सदस्य जीत दर्ज करने में सफल रहे हैं. इससे पहले 2015 में AIMIM के चार जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए थे. इस तरह से असदुद्दीन ओवैसी का यूपी में सियासत में ग्राफ बढ़ा है तो केजरीवाल ने धमाकेदार एंट्री की है. दोनों ही पार्टियों की यूपी में एंट्री से बाकी राजनीतिक दलों में बेचैनी बढ़ सकती है.

AIMIM ने जिला पंचायत चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें सुल्तानपुर और प्रयागराज में जीती हैं. सुल्तानपुर के जिला पंचायत वार्ड 30 मोहम्मद निसार, वार्ड से 32 जफर खान, वार्ड से 34 अजमल खान अज्जू, प्रयागराज में रेखा कुमारी, गाजीपुर जिले में बाबर खा, अफजल आलम, जौनपुर में कमालुद्दीन, सरोज देवी, बिजनौर जिले में नीलम उर्फ खुशबू और मोहम्मद सलीम ने जीत दर्ज की है. ऐसे ही मिर्जापुर में रंजीत कोल, कुशीनगर में मुन्ना अंसारी, आज़मगढ़ में रीना भारती, संतकबीरनर में जावेद आलम, बलिया में मुमताज़ अंसारी, बरेली में कौसर खान वारसी, मुरादाबाद में रईसुद्दीन मलिक और हरदोई में अजमतुन निशा जीती हैं. इसके अलावा बाराबंकी व संभल में एक-एक सीट पर उसे जीत मिली है.




बता दें कि पिछले पंचायत चुनाव में ओवैसी की पार्टी AIMIM ने सूबे के 18 जिलों में 50 जिला पंचायत सदस्य की सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. जिसमें AIMIM ने चार सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि 15 सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी. आजमगढ़ और मुजफ्फरनगर में एक-एक सीट और बलरामपुर जिले में उसके 2 जिला पंचायत सदस्य जीते थे. ऐसे में पांच साल के बाद ओवैसी की पार्टी ने पिछले चुनाव की तुलना में चार गुना सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे और 2015 के मुकाबले पांच गुना सीटें जीतने में कामयाब रहे.

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वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संजय सिंह यूपी में पार्टी की कमान संभाल रहे हैं. उन्होंने एक बयान में कहा कि पंचायत चुनाव के जरिए उनकी पार्टी की ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त बैठ बनी है. सीएम योगी के गोरखपुर में वार्ड 61 से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कोदई निषाद 375 वोटों से विजयी घोषित हुए हैं. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में भी एक सीट मिली है. वहीं, श्रावस्ती जिले में तीन सीटें मिली हैं. इसके अलावा बिजनौर, अमरोहा, प्रतापगढ़ सहित तमाम जिलों में एक-एक दो-दो सीटों पर जीत मिली है.




बता दें कि यूपी में सियासी जमीन मजबूत करने के लिए 2014 में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी लोकसभा सीट से चुनावी ताल ठोक दी थी. केजरीवाल के पुराने साथी कुमार विश्वास भी राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़े थे, लेकिन कोई भी जीत नहीं सका. इसके बाद 2017 में हुए यूपी निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी अपना खाता खोलने में कामयाब रही थी.

बांदा की तिंदवारा और बिजनौर की सहसपुर नगर पंचायत चेयरमैन पद का चुनाव जीतने में आम आदमी पार्टी कामयाब रही थी. इसके अलावा नगर पंचायत के 18 सभासद, नगर पालिका परिषद में 13 सदस्य और नगर निगम के चुनाव में झांसी में 2 और मुरादाबाद में एक पार्षद ने जीत हासिल की थी. वहीं, अब पंचायत चुनाव के जरिए 2022 की सियासी जमीन को मजबूत करना चाहती है.