किसानों के साथ दिल्ली के जंतर मंतर पहुंचे टिकैत, 19 दिन तक लगाएंगे किसान संसद

महीनों से चले रहे किसान आंदोलन के बीच आज गुरुवार को फिर से किसानों की दिल्ली में इंट्री हो रही है। दिल्ली से लगे बोर्डरों पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली में किसान संसद लगाने की अनुमति मिली है। ।26 जनवरी की घटना के लगभग 6 महीने बाद एक बार फिर किसानों का जत्था दिल्ली पहुंच रहा है।




भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंच चुके हैं। इससे पहले वे सिंघु बॉर्डर पहुंचे थे। यहां से बसों के जरिए वे किसानों के साथ जंतर-मंतर आए। जारी आदेश के अनुसार प्रदर्शन में सिर्फ 200 किसान शामिल हुए हैं। वे जंतर-मंतर पर किसान संसद लगाएंगे। इस मौके पर राकेश टिकैत ने कहा कि हम मानसून सत्र की कार्यवाही पर भी नजर रखेंगे।

इस बीच राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ने कहा कि किसान पहचान पत्र लगाकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हमने दिल्ली पुलिस को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का आश्वासन दिया है और हम अपने वादे पर कायम रहेंगे। बता दें कि दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने कई शर्तों के साथ किसानों को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी है।




किसानों की भीड़ की आशंका को खत्म करने के लिए सिर्फ 200 किसानों को ही प्रदर्शन स्थल पर जुटने की अनुमति मिली है। यह अनुमति 22 जुलाई से 9 अगस्त तक के लिए दी गई है और प्रदर्शन का समय भी अथॉरिटी की ओर से तय कर दिया गया है। यह प्रदर्शन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक ही किया जा सकेगा। प्रदर्शन के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का भी पूरी तरह पालन करना होगा।

जंतर मंतर पर आज से होने वाले प्रदर्शन के दौरान किसान दिनभर अपनी अलग संसद चलाएंगे और इस दौरान सरकार पर नए कृषि कानूनों को वापस लेने का दबाव डाला जाएगा। प्रदर्शन से पहले किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे संसद भवन की ओर नहीं जाएंगे मगर जंतर मंतर से ही अपनी पुरानी मांग दोहराएंगे कि उन्हें कृषि कानूनों को रद्द करने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।




देश के किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल दिसंबर से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान किसान संगठनों की केंद्र सरकार से 10 दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका है। किसान तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वह किसानों की मांगों के मुताबिक कानूनों में बदलाव कर सकती है, लेकिन कानून वापस नहीं लिए जाएंगे।

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